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UGC-NET के तीन पेपरों की दोबारा परीक्षा पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा, पीएम मोदी से मांगा जवाब

नई दिल्ली। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा UGC-NET जून 2026 परीक्षा के तीन विषयों की दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने परीक्षा व्यवस्था में सामने आई गलतियों को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा कि इसका खामियाजा उम्मीदवारों को क्यों भुगतना पड़े। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मामले में जवाब मांगा है और कहा है कि देश के युवा परीक्षा प्रणाली में बार-बार सामने आने वाली समस्याओं पर जवाब चाहते हैं।
कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने UGC-NET जून 2026 की परीक्षा को लेकर केंद्र सरकार और NTA पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि परीक्षा आयोजित होने के लगभग दो महीने बाद NTA ने स्वयं स्वीकार किया है कि अंग्रेजी, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के प्रश्न-पत्रों में तथ्यात्मक और टाइपिंग संबंधी गलतियां थीं।
इन समस्याओं के बाद NTA ने संबंधित तीन पेपरों के लिए दोबारा परीक्षा कराने का फैसला किया है। कांग्रेस ने इसी फैसले को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी की गलतियों की कीमत आखिर अभ्यर्थियों को क्यों चुकानी पड़ रही है।
UGC-NET देश की प्रमुख राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में शामिल है। इसमें बड़ी संख्या में उम्मीदवार हिस्सा लेते हैं। परीक्षा विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर तथा जूनियर रिसर्च फेलोशिप सहित संबंधित पात्रता निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में परीक्षा के तीन विषयों में दोबारा परीक्षा की घोषणा से संबंधित उम्मीदवारों को एक बार फिर तैयारी और परीक्षा प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।
जयराम रमेश ने कहा कि अंग्रेजी, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के पेपर में सामने आई तथ्यात्मक और टाइपिंग संबंधी गलतियां परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि इन खामियों की पहचान करने और दोबारा परीक्षा का निर्णय लेने में इतना समय क्यों लगा।
कांग्रेस का कहना है कि प्रतियोगी और पात्रता परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उम्मीदवार लंबे समय तक मेहनत करते हैं। परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में उन्हें यात्रा, रहने और अन्य व्यवस्थाओं पर भी खर्च करना पड़ता है। अगर किसी परीक्षा को एजेंसी की गलती के कारण दोबारा आयोजित करना पड़ता है तो इससे उम्मीदवारों को मानसिक और आर्थिक दोनों स्तर पर परेशानी होती है।
पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल किया। कांग्रेस ने पूछा कि क्या प्रधानमंत्री परीक्षा व्यवस्था में सामने आई इस समस्या पर कुछ कहेंगे। पार्टी का कहना है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता सीधे देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ी है और इसलिए सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
कांग्रेस ने इस मामले को युवाओं से जोड़ते हुए कहा कि देश के उम्मीदवार जवाब चाहते हैं। परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं से यह अपेक्षा की जाती है कि प्रश्न-पत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा आयोजित करने और परिणाम जारी करने तक की प्रक्रिया में पर्याप्त सावधानी बरती जाए। प्रश्न-पत्र में तथ्यात्मक या टाइपिंग संबंधी त्रुटियां होने से उम्मीदवारों के प्रदर्शन और परिणाम पर प्रभाव पड़ सकता है।
UGC-NET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य जुड़ा रहता है। इनमें से कई उम्मीदवार लंबे समय से परीक्षा की तैयारी करते हैं और परीक्षा के परिणाम के आधार पर उच्च शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने की योजना बनाते हैं। इसलिए परीक्षा से जुड़ी किसी भी गड़बड़ी या त्रुटि को गंभीर मामला माना जाता है।
तीन विषयों की दोबारा परीक्षा होने से प्रभावित उम्मीदवारों को अब नए परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार फिर से परीक्षा देनी होगी। कांग्रेस का सवाल है कि अगर प्रश्न-पत्र में गलतियां परीक्षा आयोजित करने वाली व्यवस्था की ओर से हुई हैं तो इसका बोझ उम्मीदवारों पर क्यों डाला जा रहा है।
पार्टी ने परीक्षा प्रक्रिया में जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई है। कांग्रेस का कहना है कि केवल दोबारा परीक्षा आयोजित कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि प्रश्न-पत्र तैयार करने और उसकी जांच की प्रक्रिया में गलतियां कैसे हुईं। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
जयराम रमेश की टिप्पणी के बाद UGC-NET की दोबारा परीक्षा का मामला राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है। विपक्ष लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न परीक्षाओं के आयोजन और उनकी पारदर्शिता को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाता रहा है। अब UGC-NET जून 2026 के तीन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने के फैसले को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर दबाव बढ़ाया है।
परीक्षा व्यवस्था में विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार और परीक्षा एजेंसियों के सामने बड़ी जिम्मेदारी है। डिजिटल तकनीक और आधुनिक परीक्षा प्रणाली के बावजूद प्रश्न-पत्र से संबंधित गलतियां सामने आने पर अभ्यर्थियों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि कांग्रेस ने इस मुद्दे को युवाओं की चिंता और उनके भविष्य से जोड़कर उठाया है।
NTA की ओर से तीन पेपरों की दोबारा परीक्षा कराने के निर्णय के बाद प्रभावित उम्मीदवारों की नजर अब नए परीक्षा कार्यक्रम और उससे संबंधित दिशानिर्देशों पर रहेगी। उम्मीदवार यह भी जानना चाहेंगे कि परीक्षा में पहले किए गए उनके प्रयास का क्या होगा और दोबारा परीक्षा की प्रक्रिया किस तरह संचालित की जाएगी।
फिलहाल कांग्रेस ने अंग्रेजी, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के पेपरों में सामने आई त्रुटियों को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। पार्टी ने सवाल किया है कि परीक्षा प्रणाली की गलतियों का नुकसान उम्मीदवारों को क्यों उठाना चाहिए और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले पर जवाब देने की मांग करते हुए कहा कि देश के युवा परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब चाहते हैं।





